दिव्यांग प्रमाण पत्र

दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड की पूरी जानकारी
भारत सरकार · दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) · UDID पोर्टल

दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड (Unique Disability ID)

पात्रता, दस्तावेज़, आवेदन प्रक्रिया, मेडिकल बोर्ड सत्यापन और डाउनलोड की पूरी और सच्ची जानकारी

दिव्यांग प्रमाण पत्र (Disability Certificate) एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की दिव्यांगता की स्थिति और निर्धारित दिव्यांगता प्रतिशत का आधिकारिक प्रमाण मिलता है। यह प्रमाण पत्र किसी तहसील या राजस्व कार्यालय से नहीं, बल्कि सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी अथवा अस्पताल के मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच के बाद जारी किया जाता है। इसके साथ जुड़ा UDID Card (Unique Disability ID Card) दिव्यांगजनों की देशभर में मान्य एक ही पहचान बनाने और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए जारी किया जाता है। दोनों के लिए आवेदन केंद्र सरकार के आधिकारिक UDID पोर्टल (swavlambancard.gov.in) के माध्यम से किया जाता है — यह किसी राज्य विशेष की सेवा नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक समान केंद्रीकृत व्यवस्था है।

मेडिकल बोर्डजारीकर्ता प्राधिकारी
21 प्रकारमान्य दिव्यांगताएं (RPwD Act 2016)
40% या अधिकअधिकतर लाभों हेतु सामान्य मानदंड
5 वर्ष / आजीवनअस्थायी बनाम स्थायी वैधता

01दिव्यांग प्रमाण पत्र क्या है

दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसा आधिकारिक दस्तावेज है जिसमें सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा व्यक्ति की दिव्यांगता का मूल्यांकन दर्ज किया जाता है। मूल्यांकन के दौरान संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक और मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता का प्रकार और उसका निर्धारित प्रतिशत तय करते हैं, जिसे बाद में प्रमाण पत्र में दर्ज किया जाता है। भारत में दिव्यांगता से जुड़े अधिकारों, पहचान और प्रमाणन व्यवस्था का मुख्य कानूनी आधार Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (RPwD Act) है। इसी अधिनियम के तहत दिव्यांगता की 21 श्रेणियों को आधिकारिक मान्यता दी गई है और प्रमाण पत्र जारी करने, मेडिकल बोर्ड के गठन तथा प्रक्रिया से जुड़े नियम तय किए गए हैं।

केवल स्वयं द्वारा बताई गई बीमारी या शारीरिक स्थिति के आधार पर दिव्यांगता प्रतिशत तय नहीं होता — यह पूरी तरह मेडिकल बोर्ड की जांच पर निर्भर करता है, जिसमें एक से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हो सकते हैं। RPwD Act, 2016 के तहत यह प्रमाण पत्र आवेदक के गृह जिले के अस्पताल से, या जहां आवेदक वर्तमान में इलाज करा रहा है उस अस्पताल से भी बनवाया जा सकता है।

RPwD Act, 2016 से पहले भारत में दिव्यांगता से संबंधित मुख्य कानून Persons with Disabilities Act, 1995 था, जिसमें केवल 7 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई थी। नए अधिनियम ने इस सूची का दायरा बढ़ाकर 21 श्रेणियों तक कर दिया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को उनकी वास्तविक स्थिति के अनुसार कानूनी पहचान और लाभ मिल सकें। इसी अधिनियम की धारा 57 के तहत सक्षम प्राधिकारी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र (Form V एकल दिव्यांगता के लिए और Form VI एक से अधिक दिव्यांगता वाले मामलों के लिए) जारी करने का अधिकार दिया गया है।

02UDID कार्ड क्या है

UDID का पूरा नाम Unique Disability ID है। यह दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में दिव्यांगजनों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को एक समान पहचान संख्या वाला कार्ड जारी करना है। इससे पहले अलग-अलग राज्यों और संस्थाओं द्वारा जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के बजाय अब एक केंद्रीकृत, देशभर में मान्य पहचान व्यवस्था उपलब्ध है।

UDID कार्ड पर एक 18 अंकों/अक्षरों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें राज्य कोड, जिला कोड, संबंधित चिकित्सा अधिकारी (CMO) कोड, दिव्यांगता के प्रकार का कोड, जन्म वर्ष और एक क्रमांक शामिल होता है। इस कार्ड को QR कोड के साथ जारी किया जाता है, जिससे इसकी जानकारी डिजिटल रूप से सत्यापित की जा सकती है। दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार कार्ड तीन अलग-अलग रंगों में जारी किया जाता है:

सफेद कार्ड — दिव्यांगता 40% से कम
पीला कार्ड — दिव्यांगता 40% से अधिक, 80% तक
नीला कार्ड — दिव्यांगता 80% से अधिक
ध्यान दें: DEPwD की अधिसूचना के अनुसार 1 अप्रैल 2024 से केंद्र व राज्य सरकार की अधिकतर योजनाओं व सेवाओं का लाभ लेने के लिए UDID कार्ड होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए केवल पुराना कागजी दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने पर भी UDID पोर्टल पर पंजीकरण कराना उपयोगी रहेगा।

03दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड में अंतर

दोनों दस्तावेज आपस में जुड़े हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है। नीचे दी गई तालिका में मुख्य अंतर स्पष्ट किया गया है:

विषयदिव्यांग प्रमाण पत्रUDID कार्ड
उद्देश्यदिव्यांगता का आधिकारिक चिकित्सा प्रमाणदिव्यांगजन की देशभर में मान्य विशिष्ट पहचान
जारीकर्तामेडिकल बोर्ड / सक्षम चिकित्सा प्राधिकारीUDID केंद्रीकृत प्रणाली, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर
स्वरूपप्रमाण पत्र (Form V/VI के अनुसार दस्तावेज)QR कोड सहित प्लास्टिक/डिजिटल कार्ड
जानकारीदिव्यांगता का प्रकार व प्रतिशत दर्ज होता हैप्रमाण पत्र से जुड़ी जानकारी कार्ड में समाहित होती है
उपयोगपात्र योजनाओं और सुविधाओं में प्रमाण के रूप मेंपहचान, सत्यापन व सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए
आवेदनUDID पोर्टल के माध्यम से एक साथ आवेदनUDID पोर्टल (swavlambancard.gov.in)

04दिव्यांगता की 21 मान्य श्रेणियां

RPwD Act, 2016 के तहत निम्नलिखित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को आधिकारिक मान्यता दी गई है, जिनके लिए प्रमाण पत्र और UDID कार्ड जारी किया जा सकता है:

दृष्टिबाधित (Blindness)
कम दृष्टि (Low Vision)
श्रवण बाधित/बहरापन
कम सुनना (Hard of Hearing)
चलने-फिरने संबंधी विकलांगता
बौनापन (Dwarfism)
बौद्धिक विकलांगता
मानसिक बीमारी
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर
सेरेब्रल पाल्सी
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल स्थितियां
विशिष्ट सीखने की अक्षमता
वाक् व भाषा विकलांगता
थैलेसीमिया
हीमोफिलिया
सिकल सेल रोग
मल्टीपल डिसेबिलिटीज
एसिड अटैक पीड़ित
पार्किंसंस रोग
मल्टीपल स्केलेरोसिस / कुष्ठ रोग मुक्त

प्रत्येक श्रेणी के मूल्यांकन के लिए अलग चिकित्सा मानक और विशेषज्ञ (जैसे नेत्र रोग विशेषज्ञ, ENT, मनोचिकित्सक, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ आदि) निर्धारित हैं। जिस श्रेणी में आवेदक की दिव्यांगता आती है, उसी के अनुसार संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक जांच करते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी व्यक्ति में एक साथ एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता भी हो सकती है, जिसे Multiple Disabilities की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर एक संयुक्त मूल्यांकन तैयार किया जाता है और Form VI के अंतर्गत प्रमाण पत्र जारी होता है। इसके अलावा, अधिकतर सरकारी योजनाओं व आरक्षण संबंधी लाभों के लिए सामान्यतः 40% या उससे अधिक दिव्यांगता होने की शर्त लागू होती है, हालांकि यह सीमा हर योजना में अलग हो सकती है और कुछ योजनाएं दिव्यांगता के प्रतिशत से स्वतंत्र भी हो सकती हैं — इसलिए संबंधित योजना के आधिकारिक नियम जरूर देखें।

05वैधता के आधार पर प्रमाण पत्र के प्रकार

दिव्यांगता प्रमाण पत्र मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है — अस्थायी (Temporary) और स्थायी (Permanent):

विषयअस्थायी प्रमाण पत्रस्थायी प्रमाण पत्र
कब जारी होता हैजब स्थिति में समय के साथ सुधार या बदलाव संभव माना जाता हैजब दिव्यांगता में सुधार की कोई संभावना नहीं होती
सामान्य वैधताआमतौर पर 5 वर्ष तकआजीवन (कोई समाप्ति तिथि नहीं)
नवीनीकरणवैधता समाप्त होने से पहले दोबारा मेडिकल जांच जरूरीसामान्यतः दोबारा जांच की जरूरत नहीं
ध्यान दें: कुछ विशेष श्रेणियों (जैसे बौद्धिक विकलांगता, ऑटिज्म या मानसिक बीमारी) में वैधता अवधि अलग-अलग उम्र के पड़ावों पर पुनर्मूल्यांकन के साथ भी तय की जा सकती है। सटीक वैधता प्रमाण पत्र पर दर्ज विवरण और मेडिकल बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करती है, इसलिए अपने प्रमाण पत्र पर लिखी वैधता अवधि जरूर देखें।

व्यावहारिक रूप से इसका मतलब यह है कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात विकासात्मक देरी (Global Developmental Delay) जैसी स्थिति पाई जाती है, तो शुरुआत में अस्थायी प्रमाण पत्र दिया जा सकता है, जिसकी उम्र के अलग-अलग पड़ावों (जैसे 10 वर्ष या 18 वर्ष की आयु) पर दोबारा जांच कर उसे अद्यतन या स्थायी किया जा सकता है। वहीं दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित या चलने-फिरने से जुड़ी ऐसी स्थायी दिव्यांगताएं, जिनमें सुधार की चिकित्सकीय संभावना नहीं होती, आमतौर पर शुरुआत से ही स्थायी प्रमाण पत्र के रूप में जारी की जाती हैं।

06कौन आवेदन कर सकता है

ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे RPwD Act, 2016 के तहत मान्य 21 श्रेणियों में से किसी में दिव्यांगता है, वह दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन के बाद संबंधित चिकित्सा प्राधिकारी व्यक्ति की जांच करता है, और विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा मेडिकल बोर्ड के मूल्यांकन के आधार पर ही अंतिम प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। नाबालिग की ओर से माता-पिता या अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। जिन व्यक्तियों के पास पहले से किसी अन्य माध्यम से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र है, वे भी UDID पोर्टल पर पंजीकरण कर अपना UDID कार्ड बनवा सकते हैं।

आवेदन के लिए किसी विशेष आय सीमा, जाति या निवास संबंधी शर्त की जरूरत नहीं होती — यह प्रमाण पत्र पूरी तरह चिकित्सा मूल्यांकन पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि देश के किसी भी राज्य का नागरिक, चाहे वह किसी भी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, यदि उसकी दिव्यांगता RPwD Act की मान्य श्रेणियों में आती है, तो वह आवेदन कर सकता है।

07आवश्यक दस्तावेज़

  • पहचान प्रमाण: आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान पत्र।
  • फोटो: हाल की पासपोर्ट साइज फोटो।
  • हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान: आवेदन में अपलोड करने के लिए।
  • संपर्क विवरण: मोबाइल नंबर व पता।
  • जन्मतिथि प्रमाण: संबंधित दस्तावेज।
  • पुराना दिव्यांगता प्रमाण पत्र: यदि पहले से उपलब्ध हो, तो उसकी प्रति।
  • चिकित्सा विवरण/रिपोर्ट: पुराने इलाज या मेडिकल रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज, यदि उपलब्ध हों।

दस्तावेजों की अंतिम सूची आवेदक की स्थिति और संबंधित चिकित्सा प्राधिकारी के अनुसार अलग हो सकती है — आवेदन से पहले आधिकारिक UDID पोर्टल पर वर्तमान सूची जरूर देखें।

08ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड, दोनों के लिए एक ही आवेदन प्रक्रिया के तहत काम होता है। सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. पोर्टल खोलें: आधिकारिक UDID पोर्टल (swavlambancard.gov.in) पर जाएं और "Apply for Disability Certificate & UDID Card" विकल्प चुनें।
  2. पंजीकरण करें: मोबाइल नंबर व आधार से नया पंजीकरण करें या पहले से बने अकाउंट में लॉगिन करें।
  3. व्यक्तिगत विवरण भरें: नाम, पता, जन्मतिथि, संपर्क जानकारी और दिव्यांगता से संबंधित प्रारंभिक विवरण दर्ज करें।
  4. दस्तावेज अपलोड करें: फोटो, हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान, आधार कार्ड व अन्य मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें।
  5. अस्पताल/चिकित्सा केंद्र चुनें: जिस अस्पताल या मेडिकल बोर्ड के पास जांच करानी है, उसे सूची में से चुनें।
  6. आवेदन जमा करें: सभी जानकारी जांचकर आवेदन सबमिट करें और रजिस्ट्रेशन रसीद का प्रिंट-आउट निकाल लें।
  7. अस्पताल जाकर जांच कराएं: रसीद और मूल दस्तावेजों के साथ चुने गए अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के पास निर्धारित तिथि पर जाएं।
  8. मेडिकल बोर्ड मूल्यांकन: विशेषज्ञ चिकित्सक जांच के बाद रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसके आधार पर मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता का प्रकार व प्रतिशत तय करता है।
  9. प्रमाण पत्र व कार्ड जारी: मेडिकल बोर्ड की स्वीकृति के बाद प्रमाण पत्र और UDID कार्ड ऑनलाइन जारी कर दिया जाता है, और कार्ड पंजीकृत पते पर भी भेजा जा सकता है।
ध्यान दें: कुछ मामलों में ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जाते हैं, जिन्हें बाद में संबंधित एजेंसी द्वारा UDID की डिजिटल प्रणाली में दर्ज किया जाता है। मेडिकल जांच का न्यूनतम समय स्थानीय अस्पताल की उपलब्धता पर निर्भर करता है और सामान्यतः कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक लग सकता है।

09मेडिकल बोर्ड जांच में क्या होता है

चिकित्सा जांच के दिन आवेदक को निर्धारित अस्पताल में मूल दस्तावेजों और आवेदन रसीद के साथ उपस्थित होना होता है। दिव्यांगता की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग विशेषज्ञ चिकित्सक जांच में शामिल होते हैं — उदाहरण के लिए, दृष्टि संबंधी मामलों में नेत्र रोग विशेषज्ञ, श्रवण संबंधी मामलों में ENT विशेषज्ञ और ऑडियोलॉजिस्ट, चलने-फिरने संबंधी विकलांगता में ऑर्थोपेडिक या न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ, तथा बौद्धिक विकलांगता या ऑटिज्म जैसे मामलों में मनोचिकित्सक और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की जांच शामिल हो सकती है।

प्रत्येक विशेषज्ञ अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें दिव्यांगता की गंभीरता को निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार अंकित किया जाता है। यदि आवेदक में एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता पाई जाती है, तो सभी संबंधित विशेषज्ञों की रिपोर्ट को मिलाकर मेडिकल बोर्ड एक संयुक्त मूल्यांकन तैयार करता है। इन सभी रिपोर्टों के आधार पर मेडिकल बोर्ड अंतिम दिव्यांगता प्रतिशत तय करता है और सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ आधिकारिक प्रमाण पत्र (Form V अथवा Form VI) जारी करता है।

ध्यान दें: कुछ जटिल मामलों में एक ही दिन में जांच पूरी नहीं हो पाती और आवेदक को दोबारा बुलाया जा सकता है, या अतिरिक्त जांच/रिपोर्ट मांगी जा सकती है। ऐसी स्थिति में धैर्य रखें और अस्पताल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।

10आवेदन शुल्क

आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र और UDID कार्ड के लिए मेडिकल जांच व पंजीकरण निःशुल्क या बहुत मामूली शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती है, क्योंकि यह एक कल्याणकारी सरकारी सेवा है। हालांकि यदि आवेदक किसी निजी अधिकृत अस्पताल या विशेष जांच केंद्र से जांच कराना चाहता है, तो वहां शुल्क अलग हो सकता है। सटीक शुल्क संरचना राज्य, अस्पताल और जांच के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले चुने गए अस्पताल या UDID पोर्टल से इसकी पुष्टि कर लें।

11आवेदन की स्थिति कैसे देखें

आवेदन जमा अस्पताल चयन विशेषज्ञ चिकित्सक जांच मेडिकल बोर्ड मूल्यांकन प्रमाण पत्र व कार्ड जारी

आवेदन जमा करने के बाद UDID पोर्टल पर उपलब्ध Track Your Application सुविधा के माध्यम से Enrolment Number, मोबाइल नंबर, आधार नंबर या UDID नंबर की सहायता से आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है। यदि आवेदन चिकित्सा जांच के चरण में लंबित है, तो संबंधित अस्पताल या चिकित्सा प्राधिकारी से भी सीधे जानकारी ली जा सकती है।

12दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड के लाभ

  • एकल दस्तावेज: बार-बार अलग-अलग प्रमाण पत्र की प्रतियां बनवाने और संभालने की जरूरत नहीं — UDID कार्ड में सारी जरूरी जानकारी दर्ज होती है, जिसे QR कोड की मदद से किसी भी विभाग में तुरंत सत्यापित किया जा सकता है।
  • सरकारी योजनाएं: दिव्यांगजन पेंशन, कल्याणकारी योजनाओं व आर्थिक सब्सिडी में पात्रता प्रमाणित करने के लिए इसका उपयोग होता है, जिससे बार-बार अलग-अलग विभागों में दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो जाती है।
  • शिक्षा: स्कूल-कॉलेज में आरक्षित सीटों, छात्रवृत्ति, प्रवेश परीक्षाओं में अतिरिक्त समय जैसी सुविधाओं व शुल्क छूट के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल होता है।
  • रोजगार: सरकारी भर्तियों में दिव्यांगजन आरक्षण, आयु सीमा में छूट और भर्ती परीक्षाओं में मिलने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक होता है।
  • यात्रा रियायतें: रेलवे व अन्य परिवहन सेवाओं में जहां दिव्यांगजनों के लिए किराये में छूट या विशेष सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध हैं, वहां यह दस्तावेज पात्रता प्रमाणित करता है।
  • सहायक उपकरण योजनाएं: व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग जैसे सहायक उपकरण मुफ्त या रियायती दर पर प्राप्त करने से जुड़ी सरकारी योजनाओं में पात्रता के लिए।
  • राष्ट्रव्यापी मान्यता: UDID कार्ड पूरे देश में एक समान पहचान के रूप में स्वीकार्य है, चाहे कार्ड किसी भी राज्य से बना हो — इससे एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर भी दस्तावेज दोबारा बनवाने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • निगरानी व पारदर्शिता: केंद्रीकृत डेटाबेस होने से गांव, ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजनों को मिलने वाले लाभों की प्रगति को बेहतर ढंग से ट्रैक किया जा सकता है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी होता है।

ध्यान रहे कि हर योजना की अपनी अलग पात्रता शर्तें होती हैं। केवल दिव्यांग प्रमाण पत्र या UDID कार्ड होना किसी विशेष योजना के तहत लाभ की स्वतः गारंटी नहीं देता — संबंधित योजना के नियम अलग से पूरे करने पड़ सकते हैं।

13प्रमाण पत्र में सुधार, नवीनीकरण और खो जाने पर

सुधार: यदि आवेदन में नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी गलत दर्ज हो गई है, तो सुधार UDID पोर्टल और संबंधित सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी के नियमों के अनुसार किया जाता है। गलत दस्तावेज खुद अपलोड करने या नया आवेदन बनाने के बजाय पहले पोर्टल पर उपलब्ध सुधार विकल्प या संबंधित प्राधिकारी से सही प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।

नवीनीकरण: अस्थायी प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त होने से पहले नवीनीकरण जरूरी होता है। UDID पोर्टल पर Disability Certificate/UDID Card के renewal से जुड़ी सुविधा उपलब्ध है, जहां दोबारा मेडिकल जांच के बाद वैधता आगे बढ़ाई जा सकती है।

खो जाने पर: यदि UDID कार्ड या प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो आधिकारिक UDID पोर्टल पर लॉगिन करके डिजिटल e-UDID कार्ड दोबारा डाउनलोड किया जा सकता है। भौतिक कार्ड न मिलने या अन्य समस्या होने पर संबंधित चिकित्सा प्राधिकारी या पोर्टल की सहायता सेवा से संपर्क करें।

14नजदीकी मेडिकल अथॉरिटी कैसे खोजें

UDID पोर्टल पर Find Nearest Medical Authority नाम की सुविधा उपलब्ध है, जिसकी मदद से अपने राज्य और जिले में उपलब्ध अधिकृत चिकित्सा प्राधिकारी या केंद्र की सूची खोजी जा सकती है। आवेदन के दौरान अस्पताल चयन करते समय यह जानकारी उपयोगी रहती है, ताकि नजदीकी और सुविधाजनक केंद्र चुना जा सके।

15धोखाधड़ी से कैसे बचें

"बिना मेडिकल जांच के तुरंत प्रमाण पत्र मिल जाएगा"
असल में: कोई भी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र बिना विशेषज्ञ चिकित्सक और मेडिकल बोर्ड की जांच के जारी नहीं होता।
"पैसे देकर ऊंचा दिव्यांगता प्रतिशत लिखवाया जा सकता है"
असल में: दिव्यांगता प्रतिशत केवल निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार मेडिकल बोर्ड तय करता है, यह किसी सौदेबाजी का विषय नहीं है और गलत तरीके से हासिल प्रमाण पत्र बाद में रद्द किया जा सकता है।
"OTP या आधार OTP बता दीजिए, कार्ड जल्दी बन जाएगा"
असल में: कोई भी वैध सरकारी अधिकारी या अस्पताल कर्मी फोन पर OTP या पासवर्ड नहीं मांगता।
"किसी निजी वेबसाइट/एजेंट से UDID कार्ड बनवाया जा सकता है"
असल में: UDID कार्ड केवल आधिकारिक पोर्टल swavlambancard.gov.in और अधिकृत अस्पतालों/मेडिकल बोर्ड के माध्यम से ही जारी होता है। सरकार ने फर्जी UDID कार्ड व प्रमाण पत्रों के प्रति सावधान रहने की सलाह भी जारी की है।

16आवेदन करते समय महत्वपूर्ण सावधानियां

  • आवेदन में सही और सटीक जानकारी भरें।
  • गलत या फर्जी दस्तावेज अपलोड न करें।
  • चिकित्सा जांच की निर्धारित तारीख पर समय से अस्पताल पहुंचें।
  • अपने पुराने मेडिकल रिकॉर्ड व इलाज से जुड़े दस्तावेज साथ रखें।
  • आवेदन संख्या/Enrolment Number सुरक्षित रखें।
  • आवेदन की स्थिति समय-समय पर पोर्टल पर जांचते रहें।
  • किसी अनधिकृत व्यक्ति को OTP या संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
  • केवल आधिकारिक UDID पोर्टल और अधिकृत चिकित्सा प्राधिकारी की जानकारी पर भरोसा करें।

?अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिव्यांग प्रमाण पत्र कौन जारी करता है?

यह प्रमाण पत्र किसी तहसील या राजस्व कार्यालय से नहीं, बल्कि सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी और अस्पताल के मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच के बाद जारी किया जाता है।

UDID का पूरा नाम क्या है?

UDID का पूरा नाम Unique Disability ID है — यह दिव्यांगजनों के लिए एक राष्ट्रव्यापी, एक समान पहचान व्यवस्था है।

क्या दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड एक ही चीज़ हैं?

नहीं। दोनों आपस में जुड़े हैं, लेकिन प्रमाण पत्र दिव्यांगता का चिकित्सा प्रमाण है, जबकि UDID कार्ड उस प्रमाण पत्र पर आधारित एक विशिष्ट, देशभर में मान्य पहचान कार्ड है।

दिव्यांगता की कितनी श्रेणियां मान्य हैं?

RPwD Act, 2016 के तहत कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को आधिकारिक मान्यता दी गई है, जिनमें दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, चलने-फिरने संबंधी विकलांगता, बौद्धिक विकलांगता, ऑटिज्म और अन्य श्रेणियां शामिल हैं।

दिव्यांगता प्रतिशत कौन तय करता है?

निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञ चिकित्सक और मेडिकल बोर्ड मिलकर दिव्यांगता के प्रकार व प्रतिशत का मूल्यांकन करते हैं। केवल स्वयं बताई गई स्थिति के आधार पर प्रतिशत तय नहीं होता।

UDID कार्ड कितने रंगों में जारी होता है और क्यों?

दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार तीन रंग के कार्ड जारी होते हैं — 40% से कम दिव्यांगता पर सफेद, 40% से 80% के बीच पीला, और 80% से अधिक दिव्यांगता पर नीला कार्ड जारी किया जाता है।

अस्थायी और स्थायी प्रमाण पत्र में क्या फर्क है?

अस्थायी प्रमाण पत्र उन मामलों में जारी होता है जहां भविष्य में स्थिति में बदलाव संभव माना जाता है, और यह आमतौर पर लगभग 5 वर्ष के लिए मान्य होता है। स्थायी प्रमाण पत्र उन मामलों में जारी होता है जहां दिव्यांगता में सुधार की कोई संभावना नहीं होती, और यह सामान्यतः आजीवन मान्य रहता है।

क्या UDID कार्ड अब सभी योजनाओं के लिए अनिवार्य है?

DEPwD की अधिसूचना के अनुसार 1 अप्रैल 2024 से केंद्र व राज्य सरकार की अधिकतर योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के लिए UDID कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है, इसलिए पुराना कागजी प्रमाण पत्र रखने वालों को भी UDID पोर्टल पर पंजीकरण कराना चाहिए।

आवेदन के बाद अस्पताल जाना जरूरी है?

हां, ऑनलाइन आवेदन के बाद चुने गए अस्पताल/मेडिकल बोर्ड के पास निर्धारित तिथि पर जाकर चिकित्सा जांच करानी होती है — जांच के बिना अंतिम प्रमाण पत्र जारी नहीं होता।

आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?

UDID पोर्टल पर Track Your Application सुविधा के माध्यम से Enrolment Number, मोबाइल नंबर, आधार नंबर या UDID नंबर से आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है।

क्या पहले से बना पुराना दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी UDID में जोड़ा जा सकता है?

हां, UDID पोर्टल पर पहले से किसी अन्य माध्यम से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र रखने वाले आवेदकों के लिए भी अलग से पंजीकरण और आवेदन का विकल्प उपलब्ध है।

क्या हर दिव्यांग व्यक्ति को सभी सरकारी लाभ अपने आप मिल जाते हैं?

नहीं। हर योजना या सुविधा की अपनी अलग पात्रता शर्तें होती हैं। दिव्यांग प्रमाण पत्र या UDID कार्ड होने के बावजूद संबंधित योजना की अन्य शर्तें अलग से पूरी करनी पड़ सकती हैं।

UDID कार्ड या प्रमाण पत्र खो जाए तो क्या करें?

UDID पोर्टल पर लॉगिन करके डिजिटल e-UDID कार्ड दोबारा डाउनलोड किया जा सकता है। भौतिक कार्ड से जुड़ी किसी अन्य समस्या के लिए संबंधित चिकित्सा प्राधिकारी या पोर्टल की सहायता सेवा से संपर्क करें।

क्या आवेदन के लिए कोई शुल्क देना होता है?

आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में मेडिकल जांच व पंजीकरण निःशुल्क या बहुत मामूली शुल्क पर होती है। किसी निजी अधिकृत केंद्र से जांच कराने पर शुल्क अलग हो सकता है — सटीक जानकारी चुने गए अस्पताल या UDID पोर्टल से लें।

मेडिकल बोर्ड जांच में कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल होते हैं?

यह दिव्यांगता की श्रेणी पर निर्भर करता है — जैसे दृष्टि संबंधी मामलों में नेत्र रोग विशेषज्ञ, श्रवण संबंधी मामलों में ENT विशेषज्ञ, चलने-फिरने संबंधी मामलों में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ और मानसिक/बौद्धिक दिव्यांगता में मनोचिकित्सक व क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट शामिल हो सकते हैं।

दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड दिव्यांगजनों के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जो उन्हें उनकी दिव्यांगता का आधिकारिक चिकित्सा प्रमाण देने के साथ-साथ पूरे देश में एक समान, विश्वसनीय पहचान भी देते हैं। इनके लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन आधिकारिक UDID पोर्टल के माध्यम से किया जाता है, और अंतिम प्रमाण पत्र केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों व मेडिकल बोर्ड की सावधानीपूर्वक जांच के बाद ही जारी होता है। यह प्रक्रिया कागज़ी और असंगठित प्रमाण पत्रों की तुलना में अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और देशभर में एक समान है, जिससे दिव्यांगजनों को अलग-अलग राज्यों या विभागों में बार-बार अपनी पहचान साबित करने की परेशानी से भी राहत मिलती है। आवेदन से पहले हमेशा वर्तमान दस्तावेज सूची, प्रक्रिया, अपने निकटतम अधिकृत चिकित्सा केंद्र की जानकारी और संबंधित योजना के नियम आधिकारिक पोर्टल पर जरूर जांच लें, ताकि आवेदन में देरी या अस्वीकृति से बचा जा सके।

महत्वपूर्ण सूचना: दिव्यांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड से जुड़ी पात्रता, दस्तावेज, प्रक्रिया, वैधता और नियम सरकार की नीति के अनुसार समय-समय पर बदल सकते हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक UDID पोर्टल (swavlambancard.gov.in) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (depwd.gov.in) की वर्तमान जानकारी अवश्य जांचें।
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दिव्यांग प्रमाण पत्र

दिव्यांगजन हेतु प्रमाण पत्र आवेदन व स्थिति जांचने के लिए त्वरित लिंक

यह पेज केवल जानकारी और मार्गदर्शन हेतु है। आधिकारिक कार्य हेतु सदैव संबंधित सरकारी विभाग की वेबसाइट पर ही जाएं।

दिव्यांग प्रमाण पत्र क्या है?

दिव्यांग प्रमाण पत्र, चिकित्सा परीक्षण के आधार पर दिव्यांगता की श्रेणी व प्रतिशत प्रमाणित करता है। इसका उपयोग सरकारी योजनाओं, आरक्षण व पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह प्रमाण पत्र e-District पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन बनाया जा सकता है। LagJaaGuru.in पर हम आपको सही आधिकारिक पोर्टल तक पहुंचने में मार्गदर्शन देते हैं — कृपया अंतिम व वैध जानकारी के लिए हमेशा संबंधित सरकारी वेबसाइट का ही प्रयोग करें।

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