आयकर ई-फाइलिंग

आयकर e-Filing पोर्टल की पूरी जानकारी हिंदी में
आयकर विभाग, भारत सरकार

आयकर e-Filing पोर्टल की पूरी जानकारी हिंदी में

ITR दाखिल करने की प्रक्रिया, फॉर्म चुनना, ड्यू डेट, e-Verify, Form 26AS/AIS और रिफंड से जुड़ी हर जानकारी

आयकर e-Filing Portal भारत सरकार के आयकर विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया आधिकारिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से करदाता घर बैठे आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने, रिफंड की स्थिति देखने, टैक्स भुगतान करने, फॉर्म डाउनलोड करने और आयकर से जुड़ी विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि पोर्टल पर कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं, कौन-सा ITR Form किसके लिए है, ऑनलाइन ITR कैसे दाखिल करें, ड्यू डेट और लेट फाइलिंग पर क्या जुर्माना लगता है, पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में कैसे चुनाव करें, e-Verify कैसे करें, Form 26AS और AIS का क्या मतलब है, तथा रिफंड और रिवाइज्ड/बिलेटेड रिटर्न से जुड़ी जरूरी जानकारी।

01आयकर e-Filing पोर्टल क्या है

आयकर e-Filing पोर्टल एक डिजिटल माध्यम है जिसके द्वारा व्यक्ति, व्यवसाय और अन्य करदाता अपनी आयकर संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं। पोर्टल पर PAN को यूजरनेम के रूप में उपयोग कर, तथा Aadhaar OTP, नेट बैंकिंग या पासवर्ड जैसे मान्य माध्यमों से लॉगिन करके विभिन्न सुविधाओं का उपयोग किया जा सकता है।

आधिकारिक वेबसाइट: incometax.gov.in — ITR दाखिल करने, रिफंड की स्थिति देखने या कोई भी टैक्स भुगतान करने के लिए हमेशा इसी आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें।

02नया Income Tax Act, 2025 और वर्तमान फाइलिंग पर असर

यह ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बात है कि आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर नया आयकर अधिनियम, 2025 (Income Tax Act, 2025) 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2025-26 (Assessment Year 2026-27) के लिए दाखिल किया जाने वाला ITR पूरी तरह पुराने अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार ही होता है, क्योंकि यह आय उस अवधि से संबंधित है जो नए अधिनियम के लागू होने से पहले की है।

  • दो अलग-अलग अनुपालन: AY 2026-27 (FY 2025-26 की आय) के लिए पुराने ITR Forms का उपयोग होगा, जबकि Tax Year 2026-27 (FY 2026-27 की आय, यानी अप्रैल 2026 से आगे की आय) से संबंधित रिटर्न जुलाई 2027 में नए अधिनियम के अंतर्गत दाखिल होगा।
  • पोर्टल दोनों व्यवस्थाओं को सपोर्ट करेगा: e-Filing पोर्टल आने वाले समय में पुराने और नए, दोनों अधिनियमों से जुड़े अनुपालन को साथ-साथ समर्थन देगा।
  • तत्काल असर सीमित: सामान्य करदाता के लिए वर्तमान फाइलिंग सीजन में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन अप्रैल 2026 से होने वाली आय, TDS और अग्रिम कर भुगतान का रिकॉर्ड नए अधिनियम के ढांचे के अनुसार रखना उपयोगी रहेगा।
यह बदलाव हाल ही में हुआ है, इसलिए इससे जुड़े व्यावहारिक दिशा-निर्देश समय के साथ और स्पष्ट होते रहेंगे। नवीनतम जानकारी के लिए हमेशा e-Filing पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक सूचनाएं देखें।

सामान्य करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है — नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य कानून की भाषा को सरल बनाना, धाराओं की पुनर्संरचना करना और अनुपालन प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाना है, न कि टैक्स की मूल अवधारणाओं में अचानक बड़ा बदलाव लाना। फिर भी, जो करदाता व्यवसाय, पूंजीगत लाभ या जटिल निवेश से जुड़े हैं, उन्हें आने वाले वर्षों में इस बदलाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

03e-Filing पोर्टल पर मिलने वाली प्रमुख सेवाएं

ITR Filingआयकर रिटर्न ऑनलाइन दाखिल करना
ITR Statusरिटर्न की प्रोसेसिंग स्थिति देखना
Refund Statusरिफंड की स्थिति ट्रैक करना
Tax PaymentAdvance Tax और Self-Assessment Tax भुगतान
Form 26ASTDS/TCS क्रेडिट की जानकारी देखना
AIS/TISवित्तीय लेनदेन का विस्तृत विवरण देखना
e-Verifyदाखिल रिटर्न को सत्यापित करना
Tax Calculatorअनुमानित टैक्स देनदारी की गणना करना

इसके अलावा पोर्टल पर पुराने ITR की जानकारी देखना, आयकर नोटिस और संबंधित संचार पढ़ना, Tax Credit से जुड़ी जानकारी देखना, तथा विभिन्न Income Tax Forms डाउनलोड करना जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

04कौन-सा ITR Form किसके लिए है

ITR दाखिल करने से पहले सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है — गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न "defective" (त्रुटिपूर्ण) माना जा सकता है। नीचे सामान्य मार्गदर्शन दिया गया है, हालांकि सटीक पात्रता आपकी व्यक्तिगत आय-स्थिति पर निर्भर करती है।

Formसामान्यतः किसके लिए
ITR-1 (Sahaj)वेतन/पेंशन, एक मकान संपत्ति (अब दो तक भी), अन्य सीमित आय वाले निवासी व्यक्ति (कुल आय ₹50 लाख तक)
ITR-2पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकान संपत्ति, या ₹50 लाख से अधिक आय वाले व्यक्ति जिनकी व्यवसाय/पेशा से आय नहीं है
ITR-3व्यवसाय या पेशे से आय वाले व्यक्ति/HUF
ITR-4 (Sugam)Presumptive Taxation Scheme (धारा 44AD/44ADA) के तहत आय वाले छोटे करदाता
ITR-5Firms, LLP, AOP, BOI जैसी संस्थाएं
ITR-6छूट प्राप्त श्रेणी को छोड़कर कंपनियां
ITR-7ट्रस्ट, राजनीतिक दल जैसी विशेष श्रेणी की संस्थाएं

प्रत्येक वर्ष CBDT (Central Board of Direct Taxes) द्वारा संबंधित Assessment Year के लिए ये फॉर्म अधिसूचित किए जाते हैं और नियत तारीख से काफी पहले e-Filing पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए जाते हैं। यदि आपकी आय-स्थिति स्पष्ट न हो, तो पोर्टल पर उपलब्ध "फॉर्म सुझाव" सुविधा या किसी योग्य टैक्स सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहता है।

05ITR दाखिल करने के लिए जरूरी जानकारी/दस्तावेज़

ITR दाखिल करने से पहले करदाता को अपनी आय और वित्तीय जानकारी तैयार रखनी चाहिए। आम तौर पर निम्न जानकारी उपयोगी होती है।

  • PAN और Aadhaar: पहचान और लॉगिन के लिए दोनों दस्तावेज़ आवश्यक हैं।
  • बैंक खाते की जानकारी: रिफंड प्राप्त करने के लिए सभी सक्रिय बैंक खातों का विवरण, विशेषकर IFSC कोड।
  • Form 16: वेतनभोगी करदाताओं के लिए नियोक्ता द्वारा जारी वेतन और TDS विवरण।
  • ब्याज आय का विवरण: बचत खाता, FD या अन्य स्रोतों से हुई ब्याज आय का विवरण।
  • अन्य आय का विवरण: किराया, पूंजीगत लाभ, व्यवसाय/पेशा या अन्य स्रोतों से हुई आय।
  • निवेश और deductions: धारा 80C, 80D जैसी लागू कटौतियों से जुड़े निवेश प्रमाण।
  • Form 26AS/AIS/TIS: इनमें उपलब्ध जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है।
  • पूंजीगत लाभ/व्यवसाय विवरण: लागू होने पर शेयर, संपत्ति बिक्री या व्यवसाय से जुड़ा विस्तृत विवरण।

06ऑनलाइन ITR कैसे दाखिल करें

  1. पोर्टल खोलें और लॉगिन करें: Income Tax e-Filing Portal पर जाकर PAN और पासवर्ड/OTP से लॉगिन करें।
  2. e-File विकल्प चुनें: मेनू में "e-File" पर जाकर "Income Tax Returns" विकल्प चुनें।
  3. Assessment Year चुनें: जिस वित्तीय वर्ष की आय के लिए रिटर्न भरना है, उसका सही Assessment Year चुनें।
  4. सही ITR Form और filing mode चुनें: अपनी आय-स्थिति के अनुसार लागू फॉर्म और ऑनलाइन/ऑफलाइन filing mode चुनें।
  5. Pre-filled जानकारी जांचें: पोर्टल द्वारा स्वतः भरी गई (pre-filled) वेतन, TDS और अन्य जानकारी को ध्यान से जांचें।
  6. आय, deductions और टैक्स भरें: शेष जानकारी दर्ज करें और उपलब्ध deductions का सही उपयोग करें।
  7. Tax calculation जांचें: अंतिम टैक्स देनदारी या रिफंड की गणना ध्यानपूर्वक जांचें।
  8. Return Submit करें: सभी जानकारी सही होने पर रिटर्न सबमिट करें।
  9. ITR को e-Verify करें: रिटर्न को अंत में निर्धारित समय-सीमा के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है, अन्यथा रिटर्न अधूरा माना जाता है।
महत्वपूर्ण: कौन-सा ITR Form भरना है और कौन-सी deductions लागू होंगी, यह व्यक्ति की आय, आय के स्रोत और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

07ड्यू डेट और लेट फाइलिंग पर जुर्माना

ITR दाखिल करने की नियत तारीख (due date) हर वर्ष करदाता की श्रेणी और लागू ITR Form के अनुसार अलग हो सकती है, और यह CBDT द्वारा अधिसूचित की जाती है। सामान्य पैटर्न इस प्रकार रहता है, हालांकि हर वर्ष इसकी पुष्टि पोर्टल पर जरूर करें।

  • वेतनभोगी/सामान्य करदाता (बिना ऑडिट): सामान्यतः 31 जुलाई — उदाहरण के लिए, वर्तमान फाइलिंग सीजन (AY 2026-27) में ITR-1/ITR-2 के लिए यह तारीख 31 जुलाई 2026 थी।
  • व्यवसाय/पेशा (बिना ऑडिट आवश्यकता): सामान्यतः 31 अगस्त — इसी सीजन में ITR-3/ITR-4 (गैर-ऑडिट) के लिए यह तारीख 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई गई थी।
  • ऑडिट आवश्यक मामले: सामान्यतः 31 अक्टूबर — इसी सीजन में यह तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी।
  • बिलेटेड रिटर्न (Belated Return): यदि नियत तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं हो पाया, तो देर से रिटर्न सामान्यतः उसी वर्ष के 31 दिसंबर तक दाखिल किया जा सकता है, हालांकि इस पर जुर्माना और ब्याज लागू होता है।
देरी से फाइलिंग पर धारा 234F के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है (आय ₹5 लाख से कम होने पर कम फीस), साथ ही धारा 234A के तहत बकाया टैक्स पर मासिक ब्याज भी लागू हो सकता है। देर से रिटर्न दाखिल करने पर कुछ नुकसान (जैसे कुछ प्रकार के घाटे को आगे ले जाने की सुविधा) भी खत्म हो सकते हैं। CBDT कई बार तकनीकी कारणों से तारीख बढ़ाती भी है, इसलिए नियत तारीख के करीब पहुंचने पर आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम सूचना जरूर जांचें।

08पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में चुनाव

ITR दाखिल करते समय करदाता को पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) और नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) में से एक चुनने का विकल्प मिलता है, दोनों की टैक्स दरें और उपलब्ध deductions अलग-अलग होती हैं।

  • वेतनभोगी करदाता (बिना व्यवसाय आय): हर वर्ष ITR में सीधे दोनों व्यवस्थाओं के बीच चुनाव बदल सकते हैं, बशर्ते रिटर्न नियत तारीख तक दाखिल हो।
  • व्यवसाय/पेशा से आय वाले करदाता: नई व्यवस्था से बाहर निकलने के लिए नियत तारीख तक Form 10-IEA दाखिल करना जरूरी होता है, और नई व्यवस्था में वापस जाने का विकल्प जीवन में केवल एक बार उपलब्ध होता है।
  • बिलेटेड रिटर्न पर प्रतिबंध: यदि रिटर्न नियत तारीख के बाद (belated) दाखिल किया जाता है, तो उस वर्ष के लिए पुरानी व्यवस्था चुनने का विकल्प उपलब्ध नहीं रहता — रिटर्न अनिवार्य रूप से नई व्यवस्था के अनुसार ही माना जाता है।

इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करना केवल जुर्माने से बचने के लिए ही नहीं, बल्कि टैक्स व्यवस्था चुनने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों व्यवस्थाओं में से कौन-सी अधिक फायदेमंद है, यह पोर्टल पर उपलब्ध Tax Calculator से जांचा जा सकता है, और अपनी वास्तविक निवेश तथा खर्च की आदतों को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष इसकी दोबारा समीक्षा करना एक समझदारी भरा कदम है।

09ITR e-Verify क्या है और कैसे करें

ITR जमा करने के बाद return को verify करना आवश्यक होता है, अन्यथा रिटर्न को दाखिल ही नहीं माना जाता। e-Verification के लिए उपलब्ध विकल्पों में परिस्थितियों के अनुसार निम्न माध्यम शामिल हो सकते हैं।

Aadhaar OTPआधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP से सत्यापन
नेट बैंकिंगबैंक की नेट बैंकिंग सेवा के माध्यम से सत्यापन
बैंक/डीमैट EVCपूर्व-सत्यापित बैंक या डीमैट खाते से Electronic Verification Code
फिजिकल ITR-Vहस्ताक्षरित ITR-V प्रति डाक द्वारा CPC बेंगलुरु भेजना (यदि ऑनलाइन सत्यापन संभव न हो)

रिटर्न को सामान्यतः रिटर्न दाखिल करने की एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर verify करना जरूरी होता है — यदि इस अवधि में verify नहीं किया जाता, तो रिटर्न अमान्य (invalid) माना जा सकता है। इसलिए ITR सबमिट करते ही, संभव हो तो उसी समय e-Verify भी कर लें।

अधिकतर करदाताओं के लिए Aadhaar OTP सबसे तेज और सुविधाजनक तरीका है, बशर्ते आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो। यदि आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय न हो, तो नेट बैंकिंग या पूर्व-सत्यापित बैंक/डीमैट खाते के माध्यम से भी सत्यापन किया जा सकता है। फिजिकल ITR-V भेजने का विकल्प केवल तभी उपयोग करें जब कोई भी ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध न हो, क्योंकि डाक से भेजने में समय लगता है और ट्रैकिंग की अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

10Form 26AS, AIS और TIS को समझें

  • Form 26AS: इसमें करदाता से संबंधित tax credit (TDS/TCS) और अग्रिम/स्व-निर्धारण कर भुगतान जैसी जानकारी दिखाई देती है।
  • AIS (Annual Information Statement): इसमें विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध वित्तीय लेनदेन और कर-संबंधी जानकारी का कहीं अधिक विस्तृत विवरण मिलता है, जैसे ब्याज, लाभांश, शेयर लेनदेन, विदेशी प्रेषण आदि।
  • TIS (Taxpayer Information Summary): यह AIS में मौजूद जानकारी का श्रेणी-वार सारांश है, जो ITR भरते समय संदर्भ के लिए उपयोगी होता है।

ITR दाखिल करने से पहले AIS और Form 26AS में उपलब्ध जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाना बेहद उपयोगी रहता है, क्योंकि इनमें दिखाई गई जानकारी और ITR में दर्ज जानकारी के बीच बड़ा अंतर होने पर भविष्य में आयकर विभाग से नोटिस या पूछताछ की संभावना बढ़ सकती है। यदि AIS में कोई जानकारी गलत लगे, तो पोर्टल पर उपलब्ध फीडबैक विकल्प के माध्यम से सुधार का अनुरोध किया जा सकता है।

11Income Tax Refund क्या है और स्थिति कैसे देखें

यदि करदाता द्वारा भुगतान किया गया कुल tax उसकी वास्तविक tax liability से अधिक है, और return processing के बाद refund बनता है, तो पात्रता के अनुसार tax refund जारी किया जाता है। रिफंड सामान्यतः सीधे करदाता के आधार-लिंक्ड, पूर्व-सत्यापित बैंक खाते में जमा किया जाता है।

  1. पोर्टल पर लॉगिन करें: e-Filing Portal पर अपने खाते में लॉगिन करें।
  2. "e-File" → "Income Tax Returns" → "View Filed Returns" खोलें: दाखिल किए गए रिटर्न की सूची देखें।
  3. संबंधित Assessment Year चुनें: जिस वर्ष का रिफंड जानना है, वह चुनें।
  4. Status जांचें: रिटर्न की स्थिति देखें — filed, verified, processed, refund issued जैसी विभिन्न स्थितियां दिखाई दे सकती हैं।

यदि रिफंड में असामान्य देरी हो, तो सबसे पहले बैंक खाता सही तरीके से पूर्व-सत्यापित (pre-validated) है या नहीं, यह जांचें — गलत या असत्यापित बैंक विवरण रिफंड में देरी की एक सामान्य वजह है।

12Advance Tax क्या है और कब देना होता है

Advance Tax उस टैक्स को कहा जाता है जो करदाता को साल भर में होने वाली अनुमानित आय पर पहले से, किश्तों में चुकाना होता है, न कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद एक साथ। यह उन करदाताओं पर लागू होता है जिनकी कुल टैक्स देनदारी (TDS काटने के बाद) एक निर्धारित सीमा से अधिक होती है।

किश्तसामान्य नियत तारीखन्यूनतम भुगतान
पहली किश्त15 जून तकअनुमानित टैक्स का 15%
दूसरी किश्त15 सितंबर तकअनुमानित टैक्स का 45%
तीसरी किश्त15 दिसंबर तकअनुमानित टैक्स का 75%
चौथी किश्त15 मार्च तकअनुमानित टैक्स का 100%

यदि Advance Tax समय पर या पूरा नहीं चुकाया जाता, तो धारा 234B और 234C के तहत ब्याज लागू हो सकता है। जिन वेतनभोगी करदाताओं का टैक्स पूरी तरह TDS से कट जाता है, उन्हें सामान्यतः अलग से Advance Tax देने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन जिनकी अन्य स्रोतों से भी उल्लेखनीय आय है (जैसे पूंजीगत लाभ, किराया, फ्रीलांस आय), उन्हें इसका ध्यान रखना जरूरी है।

13Tax Audit किन्हें और क्यों जरूरी है

कुछ व्यवसाय और पेशेवरों के लिए अपने खातों का Tax Audit कराना अनिवार्य होता है, जो धारा 44AB के अंतर्गत आता है। यह ऑडिट किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किया जाता है और इसकी रिपोर्ट भी ITR के साथ या उससे पहले पोर्टल पर अपलोड करनी होती है।

  • व्यवसाय के लिए टर्नओवर सीमा: एक निर्धारित वार्षिक टर्नओवर से अधिक होने पर व्यवसायों के लिए ऑडिट अनिवार्य हो सकता है।
  • पेशेवरों के लिए सकल प्राप्ति सीमा: डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवरों के लिए भी एक निर्धारित सकल प्राप्ति सीमा से अधिक आय पर ऑडिट लागू हो सकता है।
  • Presumptive Taxation से जुड़ी शर्तें: धारा 44AD/44ADA के तहत Presumptive Taxation चुनने वाले कुछ करदाताओं के लिए भी विशेष परिस्थितियों में ऑडिट आवश्यक हो सकता है।

टर्नओवर/प्राप्ति की सटीक सीमा समय-समय पर बदलती रहती है, इसलिए यह जांचना जरूरी है कि आप पर ऑडिट लागू होता है या नहीं। यह जानकारी किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से जरूर सत्यापित करें, क्योंकि ऑडिट लागू होने पर ITR दाखिल करने की नियत तारीख भी सामान्यतः बाद की होती है।

14ITR भरते समय होने वाली सामान्य गलतियां

  • गलत ITR Form चुनना: आय-स्रोत के अनुसार गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न त्रुटिपूर्ण (defective) माना जा सकता है।
  • AIS/Form 26AS से मिलान न करना: इनमें दिखाई गई जानकारी और ITR में दर्ज जानकारी में अंतर होने पर नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • सभी आय स्रोतों की जानकारी न देना: ब्याज, छोटी फ्रीलांस आय या अन्य स्रोतों से हुई आय को छोड़ देना एक सामान्य गलती है, जो बाद में जांच के दायरे में आ सकती है।
  • बैंक खाता पूर्व-सत्यापित न होना: इससे रिफंड में अनावश्यक देरी हो सकती है।
  • e-Verify भूल जाना: रिटर्न सबमिट करने के बाद उसे समय पर verify न करने से पूरी फाइलिंग प्रक्रिया अधूरी और अमान्य मानी जा सकती है।
  • अंतिम समय पर फाइलिंग करना: नियत तारीख के अंतिम दिनों में पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी समस्या आने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए जल्दी फाइल करना बेहतर रहता है।

15अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए ITR फाइलिंग

अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए भी भारत में अर्जित या प्राप्त आय पर ITR फाइलिंग के नियम लागू होते हैं, हालांकि इनकी शर्तें निवासी करदाताओं से कुछ अलग होती हैं।

  • भारत-स्रोत आय पर कर दायित्व: भारत में अर्जित वेतन, किराया, पूंजीगत लाभ या ब्याज जैसी आय पर NRI को भी सामान्यतः ITR दाखिल करना पड़ सकता है।
  • लागू ITR Form: NRI सामान्यतः ITR-2 या ITR-3 का उपयोग करते हैं, आय के स्रोत के अनुसार, क्योंकि ITR-1 केवल निवासी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है।
  • DTAA का लाभ: यदि भारत का संबंधित देश के साथ Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) है, तो दोहरे कराधान से बचने के लिए इसके प्रावधानों का लाभ लिया जा सकता है।
  • विदेशी बैंक खाता जानकारी: रिफंड पाने के लिए NRI को भारतीय बैंक खाता या पात्रता अनुसार अन्य निर्धारित विकल्प उपलब्ध कराना होता है।

NRI टैक्सेशन से जुड़े नियम अपेक्षाकृत जटिल होते हैं, इसलिए इस श्रेणी के करदाताओं को किसी अनुभवी टैक्स सलाहकार की मदद लेना विशेष रूप से उपयोगी रहता है।

16Revised, Belated और Updated Return (ITR-U)

ITR दाखिल करने के बाद अगर कोई गलती नजर आए या रिटर्न देर से दाखिल करना पड़े, तो स्थिति के अनुसार अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं।

  • Revised Return: यदि मूल रिटर्न में कोई गलती या चूक हो, तो उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर संशोधित किया जा सकता है। हाल में हुए एक बदलाव के अनुसार, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा अगले वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक बढ़ाई जा सकती है, हालांकि इसके साथ एक निर्धारित शुल्क (₹1,000 से ₹5,000 तक, आय के अनुसार) भी लागू हो सकता है — सटीक प्रावधान के लिए पोर्टल पर नवीनतम जानकारी जरूर जांचें।
  • Belated Return: यदि मूल नियत तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं हो सका, तो उसे देर से (belated) दाखिल किया जा सकता है, सामान्यतः उसी वर्ष के 31 दिसंबर तक, जुर्माने और ब्याज के साथ।
  • Updated Return (ITR-U): यदि सामान्य संशोधन/देर से दाखिल करने की समय-सीमा भी निकल चुकी हो, तो धारा 139(8A) के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर Updated Return (ITR-U) दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है, जिसमें अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है।
इन तीनों विकल्पों की सटीक समय-सीमा, शुल्क और शर्तें कानून में समय-समय पर बदलती रहती हैं, इसलिए अंतिम और सटीक जानकारी के लिए हमेशा e-Filing पोर्टल या किसी योग्य टैक्स सलाहकार से पुष्टि करें।

17सामान्य Deductions जो लागू हो सकती हैं

पुरानी टैक्स व्यवस्था में कई प्रकार की deductions उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग सही तरीके से करने पर टैक्स योग्य आय काफी कम हो सकती है। नई व्यवस्था में इनमें से अधिकतर deductions उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए विकल्प चुनने से पहले यह जरूर जांचें कि आपकी स्थिति में कौन-सी व्यवस्था अधिक फायदेमंद है।

  • धारा 80C: जीवन बीमा प्रीमियम, PPF, ELSS म्यूचुअल फंड, होम लोन के मूलधन जैसे निवेशों पर एक निर्धारित सीमा तक कटौती।
  • धारा 80D: स्वयं और परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती।
  • धारा 80TTA/80TTB: बचत खाते पर मिले ब्याज (वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज सहित) पर एक निश्चित सीमा तक कटौती।
  • होम लोन ब्याज (धारा 24): स्वयं के मकान के लिए लिए गए होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कटौती।
  • HRA छूट: वेतनभोगी करदाताओं के लिए किराए के मकान में रहने पर House Rent Allowance से जुड़ी छूट।
  • अन्य निर्धारित कटौतियां: शिक्षा ऋण ब्याज, दिव्यांगता, निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज जैसी परिस्थितियों में भी अलग-अलग धाराओं के तहत कटौती उपलब्ध हो सकती है।

हर deduction की अपनी शर्तें, अधिकतम सीमा और आवश्यक दस्तावेज़ होते हैं, इसलिए ITR भरते समय संबंधित निवेश या भुगतान के प्रमाण अपने पास सुरक्षित रखें, भले ही रिटर्न फाइलिंग के समय ये दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता न हो — भविष्य में आयकर विभाग की जांच में ये काम आ सकते हैं।

18किन लोगों को ITR दाखिल करने की आवश्यकता हो सकती है

ITR filing की आवश्यकता व्यक्ति की आय, लागू कानून, आय के स्रोत और अन्य निर्धारित परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

  • आय सीमा से अधिक होने पर: यदि कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक है, तो सामान्यतः ITR दाखिल करना आवश्यक होता है।
  • व्यवसाय/पेशा से आय: व्यवसाय या पेशे से आय वाले व्यक्तियों के लिए भी ITR filing लागू हो सकती है, भले ही कुल आय छूट सीमा से कम हो।
  • पूंजीगत लाभ: शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति की बिक्री से पूंजीगत लाभ होने पर भी रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो सकता है।
  • निर्धारित विशेष परिस्थितियां: कुछ मामलों में बड़ी राशि का बैंक जमा, विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च, बिजली बिल की बड़ी राशि, या विदेशी संपत्ति/आय होने पर भी, आय सीमा से कम होने पर भी, ITR दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है।

केवल salary पाने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उपरोक्त किसी भी श्रेणी में आने वाले करदाताओं को अपनी पात्रता स्वयं जांचनी चाहिए या किसी टैक्स सलाहकार से इसकी पुष्टि करनी चाहिए।

19महत्वपूर्ण शब्दावली – आसान भाषा में समझें

  • Assessment Year (AY): वह वर्ष जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की आय का आकलन और रिटर्न फाइलिंग होती है — उदाहरण के लिए, FY 2025-26 की आय के लिए AY 2026-27 होता है।
  • Financial Year (FY): 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि, जिसमें आय अर्जित की जाती है।
  • TDS (Tax Deducted at Source): आय के भुगतान के समय ही स्रोत पर काटा गया कर, जो Form 26AS में दिखाई देता है।
  • Deduction: कुल आय में से कानूनी रूप से घटाई जाने वाली राशि (जैसे धारा 80C के निवेश), जिससे टैक्स योग्य आय कम होती है।
  • Defective Return: गलत फॉर्म चुनने या अधूरी जानकारी के कारण आयकर विभाग द्वारा त्रुटिपूर्ण घोषित किया गया रिटर्न, जिसे निर्धारित समय में सुधारना जरूरी होता है।
  • ITR-V: रिटर्न सबमिट करने के बाद जनरेट होने वाली पावती, जिसका उपयोग फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है।
  • CPC (Centralized Processing Centre): बेंगलुरु स्थित आयकर विभाग का केंद्र, जहां देशभर के ITR प्रोसेस किए जाते हैं।
  • Presumptive Taxation: छोटे व्यवसायों/पेशेवरों के लिए विस्तृत खाता-बही रखे बिना, अनुमानित आय के आधार पर टैक्स गणना की सरल व्यवस्था (धारा 44AD/44ADA)।

20Tax Calculator का उपयोग कैसे करें

e-Filing पोर्टल पर उपलब्ध Tax Calculator एक उपयोगी टूल है, जिससे ITR भरने से पहले ही अपनी अनुमानित टैक्स देनदारी का अंदाजा लगाया जा सकता है और पुरानी/नई टैक्स व्यवस्था की तुलना की जा सकती है।

  1. Tax Calculator खोलें: पोर्टल पर "Quick Links" या "Tax Tools" सेक्शन में उपलब्ध Tax Calculator चुनें।
  2. Assessment Year चुनें: जिस वर्ष के लिए गणना करनी है, वह चुनें।
  3. आय और deductions दर्ज करें: अनुमानित वेतन, अन्य आय और लागू deductions की जानकारी भरें।
  4. दोनों व्यवस्थाओं की तुलना देखें: कैलकुलेटर पुरानी और नई, दोनों व्यवस्थाओं के अनुसार अनुमानित टैक्स दिखाता है।
  5. उपयुक्त विकल्प चुनें: तुलना के आधार पर यह तय करें कि ITR भरते समय कौन-सी व्यवस्था अधिक फायदेमंद रहेगी।

ध्यान रहे कि यह कैलकुलेटर केवल अनुमानित गणना के लिए है — अंतिम टैक्स देनदारी ITR में दर्ज वास्तविक जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही तय होती है।

21e-Filing Helpdesk और संपर्क जानकारी

तकनीकी समस्या, लॉगिन में दिक्कत या फाइलिंग से जुड़े प्रश्नों के लिए आयकर विभाग एक समर्पित हेल्पडेस्क उपलब्ध कराता है।

टोल-फ्री नंबर1800-103-0025 (e-Filing और CPC से संबंधित प्रश्नों के लिए)
डायरेक्ट नंबर+91-80-4612-2000 (भारत से बाहर के करदाताओं के लिए भी उपयोगी)
सेवा का समयसोमवार से शुक्रवार सुबह 8 से रात 8 बजे तक, शनिवार सुबह 9 से शाम 6 बजे तक (राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर)
AIS संबंधी शिकायतपोर्टल पर "AIS" टैब से AIS पोर्टल पर जाकर "Help" मेन्यू में टिकट दर्ज करें

इसके अलावा पोर्टल पर उपलब्ध "Grievance" सेक्शन के माध्यम से भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। कोई भी संपर्क नंबर उपयोग करने से पहले उसे आधिकारिक पोर्टल के "Contact Us" पेज से क्रॉस-चेक जरूर करें, क्योंकि फर्जी हेल्पलाइन नंबरों से भी सतर्क रहना जरूरी है।

22सावधानियां

  • केवल आधिकारिक incometax.gov.in का उपयोग करें
  • PAN, Aadhaar, OTP किसी से साझा न करें
  • ITR submit करने से पहले सभी विवरण जांचें
  • AIS/Form 26AS से जानकारी जरूर मिलाएं
  • बैंक विवरण सही और पूर्व-सत्यापित रखें
  • अनजान लिंक पर क्लिक कर जानकारी न भरें
  • रिफंड के नाम पर फोन/SMS पर जानकारी न दें
  • समय पर e-Verify करना न भूलें
  • गलत बैंक विवरण देने से refund में समस्या हो सकती है, और किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके tax-related जानकारी दर्ज करने से फिशिंग जैसी धोखाधड़ी का खतरा रहता है। आयकर विभाग कभी भी फोन, SMS या ई-मेल के जरिए सीधे OTP, पासवर्ड या पूरी बैंक जानकारी नहीं मांगता — ऐसी किसी भी मांग को संदिग्ध मानें।

    ?अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Income Tax e-Filing Portal क्या है?

    यह आयकर विभाग का आधिकारिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां करदाता ITR filing और अन्य tax-related online services का उपयोग कर सकते हैं।

    क्या ITR ऑनलाइन दाखिल किया जा सकता है?

    हां, पात्र ITR forms को e-Filing Portal के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन दाखिल किया जा सकता है।

    ITR दाखिल करने के बाद क्या करना जरूरी है?

    Return को निर्धारित समय-सीमा के भीतर e-Verify करना जरूरी होता है, अन्यथा रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।

    Form 26AS कहां देखा जा सकता है?

    e-Filing Portal पर लॉगिन करने के बाद उपलब्ध संबंधित tax information services के माध्यम से Form 26AS देखा जा सकता है।

    AIS क्या है?

    AIS यानी Annual Information Statement करदाता से संबंधित विभिन्न वित्तीय लेनदेन और tax-related जानकारी का विस्तृत विवरण है, जो Form 26AS से भी अधिक व्यापक है।

    ITR Refund की स्थिति कैसे देखें?

    e-Filing Portal पर लॉगिन कर "View Filed Returns" सेक्शन में संबंधित Assessment Year चुनकर refund/return status देखी जा सकती है।

    क्या ITR filing के लिए PAN जरूरी है?

    हां, ITR filing में PAN की आवश्यकता होती है और यह पोर्टल पर लॉगिन तथा taxpayer identification के लिए मुख्य आधार होता है।

    क्या e-Filing Portal पर tax payment किया जा सकता है?

    हां, उपलब्ध ऑनलाइन tax payment सुविधा के माध्यम से Advance Tax और Self-Assessment Tax जैसे लागू टैक्स का भुगतान किया जा सकता है।

    क्या मोबाइल से ITR दाखिल किया जा सकता है?

    कई e-Filing सेवाएं मोबाइल browser के माध्यम से भी access की जा सकती हैं, हालांकि जटिल return filing के लिए बड़े स्क्रीन वाले device का उपयोग अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    ITR filing में गलती हो जाए तो क्या करें?

    स्थिति और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर Revised Return, या समय-सीमा निकल जाने पर Updated Return (ITR-U) दाखिल करने की आवश्यकता हो सकती है।

    ITR दाखिल करने की नियत तारीख (due date) हर साल एक जैसी रहती है क्या?

    नहीं, नियत तारीख हर साल करदाता की श्रेणी और CBDT की अधिसूचना के अनुसार बदल सकती है — इसलिए हर वर्ष पोर्टल पर नवीनतम तारीख जरूर जांचें।

    पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में क्या अंतर है?

    दोनों की टैक्स दरें और उपलब्ध deductions अलग होते हैं; वेतनभोगी करदाता हर साल इनमें बदलाव कर सकते हैं, जबकि व्यवसाय/पेशा से आय वालों के लिए इसमें कुछ अतिरिक्त शर्तें (जैसे Form 10-IEA) लागू होती हैं।

    अगर नियत तारीख के बाद रिटर्न दाखिल करूं तो क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन सकता हूं?

    नहीं, नियत तारीख के बाद (belated) दाखिल रिटर्न के लिए पुरानी व्यवस्था का विकल्प उपलब्ध नहीं रहता, ऐसे रिटर्न पर अनिवार्य रूप से नई टैक्स व्यवस्था लागू होती है।

    e-Filing हेल्पडेस्क का नंबर क्या है?

    आयकर विभाग के अनुसार टोल-फ्री नंबर 1800-103-0025 और डायरेक्ट नंबर +91-80-4612-2000 है, जो सोमवार-शुक्रवार सुबह 8 से रात 8 बजे तक और शनिवार सुबह 9 से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहता है।

    Advance Tax किसे और कब देना होता है?

    जिन करदाताओं की TDS काटने के बाद कुल टैक्स देनदारी एक निर्धारित सीमा से अधिक होती है, उन्हें जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च में निर्धारित किश्तों में Advance Tax चुकाना होता है।

    क्या NRI को भी ITR दाखिल करना पड़ता है?

    यदि किसी NRI की भारत में अर्जित आय (जैसे किराया, ब्याज, पूंजीगत लाभ) निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें भी सामान्यतः भारत में ITR दाखिल करना होता है।

    Tax Audit किन्हें कराना जरूरी है?

    एक निर्धारित टर्नओवर/सकल प्राप्ति सीमा से अधिक आय वाले व्यवसायों और पेशेवरों के लिए धारा 44AB के तहत Tax Audit अनिवार्य हो सकता है; सटीक सीमा के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।

    क्या नया Income Tax Act, 2025 इस साल की फाइलिंग को प्रभावित करता है?

    वर्तमान फाइलिंग सीजन (AY 2026-27, यानी FY 2025-26 की आय) पूरी तरह पुराने अधिनियम, 1961 के अनुसार ही होगी; नया अधिनियम केवल FY 2026-27 से आगे की आय पर लागू होगा, जिसका रिटर्न 2027 में दाखिल होगा।

    Tax Calculator से क्या फायदा होता है?

    यह टूल ITR भरने से पहले ही अनुमानित टैक्स देनदारी और पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था की तुलना दिखाता है, जिससे सही व्यवस्था चुनने में मदद मिलती है — हालांकि अंतिम टैक्स ITR में दर्ज वास्तविक जानकारी पर निर्भर करता है।

    e-Verify के लिए कौन-सा तरीका सबसे तेज है?

    यदि आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक है, तो Aadhaar OTP सबसे तेज और सुविधाजनक तरीका है; इसके अलावा नेट बैंकिंग और पूर्व-सत्यापित बैंक/डीमैट खाते से EVC भी त्वरित विकल्प हैं।

    आयकर e-Filing पोर्टल भारत में टैक्स अनुपालन को डिजिटल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। सही ITR Form चुनना, Form 26AS और AIS की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाना, नियत तारीख के भीतर रिटर्न दाखिल कर उसे तुरंत e-Verify करना — ये सभी कदम न केवल जुर्माने से बचाते हैं, बल्कि रिफंड प्रोसेसिंग को भी तेज बनाते हैं। चूंकि आयकर से जुड़े नियम, फॉर्म और नियत तारीखें हर साल थोड़ी बदल सकती हैं, और वर्तमान में नए आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने के साथ यह क्षेत्र संक्रमण के दौर से भी गुजर रहा है, इसलिए ITR दाखिल करने से ठीक पहले पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी और अधिसूचनाएं जरूर जांचें, और जटिल मामलों में किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से परामर्श लेने में संकोच न करें। अंतिम समय की भागदौड़ और पोर्टल पर संभावित तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए, जहां तक संभव हो, सभी जरूरी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखकर नियत तारीख से काफी पहले ही रिटर्न दाखिल कर लेना सबसे सुरक्षित और तनाव-मुक्त तरीका है।

    महत्वपूर्ण: यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है और यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है। आयकर से जुड़े नियम, फॉर्म, नियत तारीखें और दरें समय-समय पर बदल सकती हैं। अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार सटीक और नवीनतम जानकारी के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in देखें या किसी योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श लें।
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    आयकर ई-फाइलिंग

    आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग व रिफंड स्थिति जांचने के लिए त्वरित लिंक

    यह पेज केवल जानकारी और मार्गदर्शन हेतु है। आधिकारिक कार्य हेतु सदैव संबंधित सरकारी विभाग की वेबसाइट पर ही जाएं।

    आयकर e-Filing पोर्टल क्या है?

    आयकर विभाग का e-Filing पोर्टल नागरिकों व व्यवसायों को आयकर रिटर्न (ITR) ऑनलाइन भरने, कर भुगतान करने व रिफंड की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा देता है। यह इंस्टेंट e-PAN जैसी सेवाएं भी प्रदान करता है। LagJaaGuru.in पर हम आपको सही आधिकारिक पोर्टल तक पहुंचने में मार्गदर्शन देते हैं — कृपया अंतिम व वैध जानकारी के लिए हमेशा संबंधित सरकारी वेबसाइट का ही प्रयोग करें।

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